छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के "पुरखा के सुरता"
कार्यक्रम में याद किये गए डाॅ.बघेल
रायपुर : छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्न दृष्टा डाॅक्टर खुबचंद बघेल जी के 116 वे जन्मदिवस के अवसर में आज छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने "पुरखा के सुरता" नाम से एक कार्यक्रम नवीन मार्केट, रायपुर मे रखा कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. बघेल के प्रतिमा में माल्यार्पण कर करके हुआ।
पिछले एक साल से सेना ने "पुरखा के सुरता" नाम से छत्तीसगढ़ के महापुरुषों की जयंती एवं पुण्यतिथि मनाते आ रही है सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने बताया कि सरकार राज्य के महापुरुषों की उपेक्षा करते आ रही है और साजिश के तहत छत्तीसगढ़ियों की संस्कृति और भाषा को मिटाने का भी लगातार प्रयास कर रही है जिसे बचाने सेना आगे भी सभी छत्तीसगढ़ीया महापुरुषों को उनके जयंती एवं पुण्य तिथि में "पुरखा के सुरता" कार्यक्रम के तहत याद करता रहेगा।
उन्होंने कहा कि एक अलग छत्तीसगढ़ राज्य का सपना डाॅ.बघेल ने देखा था जो आज तक पूरा नहीं हुआ है 15 साल हो गए हैं राज्य बने लेकिन छत्तीसगढ़ , छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़िया लोगो को आज तक उनका हक नहीं मिला है और बाहर से आये लोग आज छत्तीसगढ़ के जल, जंगल एवं जमीन में राज कर रहे हैं डॉ. बघेल समाज, राजनीति और साहित्य मे बड़ा योगदान था जिसको कभी नहीं भुलाया जा सकता और उनके बताए रास्ते पर सतत क्रान्ति सेना चलती रहेगी ।
कार्यक्रम मे मुख्य रूप से कवि सुशील भोले, संजीव साहू, देव हीरा लहरी, हेमंत चंद्रवंशी, संदीप कटरिया, तुकाराम के साथ साथ भारी संख्या मे सेनानी शामिल थे, अध्यक्ष ने 31 जुलाई 2016 को क्रान्ति सेना द्वारा आयोजित "जबर हरेली रैली" भिलाई सभी को भारी संख्या मे आने के लिए नेवता दिया।